अ.भा.गो.पा. हुई दिशाहीन ड्राइवर और गनमैन चला रहे पार्टी

छिंदवाड़ा। अमरवाड़ा विधानसभा से विधायक रहे मनमोहन शाह बट्टी जो सन 2003 में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के टिकट पर पहली दफा चुनाव जीते थे, बताया जाता है कि बट्टी को चुनाव जिताने में दादा हीरा सिंह मरकाम की विशेष भूमिका रही थी । उस दरमियान मध्यप्रदेश के गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अध्यक्ष गुलजार सिंह मरकाम हुआ करते थे, गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन से जुड़े हुए सूत्र बताते हैं कि मनमोहन शाह बट्टी को चुनाव जिताने के लिए आदिवासी समाज ने अनाज और पैसा इकट्ठा किया था ।

और मनमोहन शाह बट्टी को चुनाव लड़ाया और जितवाया भी था बताया जाता है कि उसके बाद मनमोहन शाह बट्टी जो उस समय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के विधायक दल के नेता हुआ करते थे और इनके साथ 2 और भी विधायक सिवनी जिला की घंसौर आदिवासी सीट से रामगुलाम  उईके और बालाघाट की परसवाड़ा सामान्य सीट से दरबूसिंह उईके गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के विधायक हुआ करते थे ।

बताया जाता है कि मनमोहन शाह बट्टी ने दादा हीरा सिंह मरकाम जो राष्ट्रीय अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी थे उनको बगैर सूचना दिए राज्यसभा चुनाव में अपना और अपने साथियों का वोट देने की सौदेबाजी कर लिया था ,उसी के बाद मनमोहन शाह बट्टी और दादा हीरा सिंह मरकाम में दरार आ गई और मनमोहन शाह बट्टी अपने आप को सुपर पावर समझने लगे और आए दिन दादा मरकाम को नीचा दिखाने की कोशिश करने लगे, इससे आहत होकर दादा मरकाम ने 2008 के चुनाव में मनमोहन शाह बट्टी का टिकट काटकर सिंगोड़ी से शिक्षक रहे सी एल ठाकुर को टिकट दे दिया इसके बाद मनमोहन शाह बट्टी जीवन में कोई चुनाव नहीं जीत पाए ।

बताया जाता है कि उसके बाद उनके वकील मित्र के साथ मनमोहन शाह बट्टी ने राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और इसके बाद उनको  हार का सामना करना पड़ा ,इसके बाद उन्होंने अपनी अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी का निर्माण किया और उससे भी चुनाव उन्होंने लड़ा लेकिन सफलता नहीं मिली इसके बाद कोरोना महामारी की चपेट में आकर मनमोहन शाह बट्टी का दुखद निधन भोपाल में हो गया ।

इसके बाद उनकी बेटी मनमोहन शाह बट्टी की बेटी मोनिका भट्टी इस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनी मगर समाज ने उनको अध्यक्ष स्वीकार नहीं कर पाया और उनका विरोध होने लगा सीनियर नेता पूरे गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में चले गए और उनकी ऐसी हालत हो गई कि मनमोहन शाह बट्टी के गनमैन एसआर बौद्ध राष्ट्रीय महासचिव हो गए और उनके ड्राइवर और उनका स्टाफ पार्टी चलाने की सोचने लगा इसलिए अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी का नामोनिशान मिट सा गया है ।