शहीद मरकर भी लोगों के दिलों में जिंदा रहते हैं , कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को श्रध्दासुमन अर्पित

बिछुआ। नगर के शासकीय महाविद्यालय में गुरूवार के दिन कारगिल विजय दिवस महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर पी यादव के निर्देशन में मनाया गया। महाविद्यालय परिसर में एनसीसी एवं एनएसएस इकाई के संयुक्त तत्तवधान में आयोजित श्रध्दांजलि सभा में कारगिल युध्द में शहीद हुए वीर जवानों को दो मिनट का मौन धारण कर श्रध्दासुमन अर्पित की गई। प्रभारी प्राचार्य डॉ. पूजा तिवारी ने कहा कि आज ही के दिन सन् 1999 में भारतीय सैनिकों के द्वारा अपने जीवन की आहुति देकर पाकिस्तान के द्वारा कब्जे में कि पर्वत्र श्रेणी को आजाद कराया गया। डॉ. साक्षी सहारे ने कहा कि शहीद सैनिक मरने के बाद भी लोगों के दिलों में अपनी शहादत के रूप में जिंदा रहते है । राज्य स्तरीय प्रशिक्षित एनएसएस स्वयंसेवक उमेश साहू ने कारगिल विजय दिवस के बारे में विस्तार से बताया। इस श्रध्दांजलि सभा में प्रमुख रूप से प्रो. पी के स्वरूप, कपिल खरे, स्वाति जैन, एनएसएस स्वयंसेवक प्रदीप लाउतकर, राहुल राजपूत, साधुराम चौरिया, एनसीसी कैडेट राकेश साहू, रेणुका खुरगड़े, सचिन कड़वे, पवन गिर, राकेश मालवी, महेश खापरे सहित जुमना चौरिया, रामकुमार, सूर्यकांता भोरिया, प्रदीप साहू सहित सैकड़ों की संख्या में महाविद्यालयीन विद्यार्थी एवं स्टाफ कर्मी उपस्थित थे।
एनसीसी में कैडेटों का हुआ चयन ……
बिछुआ। शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में गुरूवार के दिन 24 बटालियन कमांडिंग ऑफिसर के निर्देशन में लेफ्टिनेंट प्रणीत स्वरूप के द्वारा महाविद्यालय के खेल मैदान में चयन प्रक्रिया का आयोजन किया गया। इस चयन प्रक्रिया में महाविद्यालय के सैंकड़ों नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने भाग लिया। जिसमें से 16 एसडी छात्र एवं 08 एसडब्लू छात्राओं का चयन किया गया। चयन प्रक्रिया में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. साक्षी सहारे ने कहा कि आज महिलाएँ भी किसी क्षेत्र में पीछे नहीं है। सेना के क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलकर देश सेवा कर रही है। साथ ही शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहने के लिए दैनिक जीवन अपने अलग ही फायदे है। लें. प्रणीत स्वरूप ने कहा कि विद्यार्थियों को देश की विभिन्न सेनाओं में जाने के लिए सुनहरा अवसर मिलता है। एनसीसी के सीनियर कैडेट उमेश साहू ने विद्यार्थियों से कहा रोजगार पाने के लिए एक उपयुक्त तरीका है साथ ही एनसीसी के प्रमाण पत्रों के फायदे भी बताएं। चयन प्रक्रिया को पूर्ण करने में कैडेट प्रदीप लाउतकर, रेणुका खुरगडे़ सहित अन्य का विशेष योगदान रहा।