दो दिवसीय भारिया महोत्सव का हुआ शुभारंभ

छिंदवाड़ा जगत।  नृत्य और शिल्प परम्परा के प्रशिक्षण-परिष्कार पर आधारित एकाग्र भारिया महोत्सव का पातालकोट के ग्राम चिमटीपुर में शुभारंभ किया । इस दौरान उन्होंने कहा कि आज से 40 साल पहले पातालकोट के निवासी सिर्फ नमक के लिये बाहर आया करते थे । मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के प्रयासों से आज पातालकोट क्षेत्र के बहुत विकास हुआ है । यह परिवर्तन उनके रहन-सहन, वेशभूषा व संस्कृति में दिखाई देती है । भारिया आदिवासी के विकास व संस्कृति को जीवित रखने के लिये वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे । उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिये हर संभव प्रयास करेंगे । स्व-रोजगार की दिशा में काम किया जायेगा । पेयजल तथा सिंचाई की दिशा में लगातार काम किये जा रहे है । सिंचाई के लिये साढ़े चार हजार करोड़ रूपये के काम जिले में किये जायेंगे । उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी छिन्दवाड़ा में लाने का प्रयास शुरू कर दिया है । शीघ्र ही नर्मदा का पानी छिन्दवाड़ा पहुंचेगा । क्षेत्रीय विधायक श्री सुनील उईके ने कहा कि आदिवासी संस्कृति व परम्परा को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंच देने के लिये यह दो दिवसीय भारिया उत्सव का आयोजन किया गया है जिसमें स्थानीय तथा आदिवासी जिलों के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति को और निखार सकेंगे । उन्होंने सरकार के जनहितकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देकर विकास के लिये किये जा रहे कार्यो के बारे में बताया । साथ ही पातालकोट विरासत, भारिया कल्याण तथा क्षेत्र में पेयजल को लेकर किये जा रहे कार्यो के संबंध में विस्तृत जानकारी दी । भारिया उत्सव के दौरान जनपद पंचायत तामिया के अध्यक्ष श्री उजर सिंग भारती व कामनी शाह ने भी सभा को संबोधित किया ।
भारिया उत्सव में डिण्डोरी जिले से आये तथा स्थानीय कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुति देकर सबका मन मोहा तथा अपने लोक संस्कृति का परिचय दिया । वहीं सांसद श्री नकुल नाथ ने भी उनके साथ स्थानीय वाद्य यंत्र बजाते हुये नृत्य में सहभागिता दी। इस दौरान कलेक्टर डॉ.श्रीनिवास शर्मा, पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार राय, डी.एफ.ओ. श्री एस.एस.उद्दे, एस.डी.एम. सर्वश्री अतुल सिंह व रोशन राय, सहायक संचालक आदिवासी विकास विभाग श्री सी.के.दुबे सहित अन्य जिलाधिकारी व स्थानीय जनप्रतिनिधि, बड़ी तादाद में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे ।

दर्शनीय स्थल पातालकोट

छिंदवाड़ा /नाम से ही स्पष्ट है कि यह पाताल में बसा हुआ है। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से 78 किमी. दूर स्थित यह स्थान 12 गांवों का समूह है।जिसमे आने वाले गाँव मुख्य रूप से कारेआम, रातेड़,गैलडुब्बा ,चिमटीपुर ,कोडिया ,घाटलिंगा ,जड़मादल प्रकृति की गोद में बसा यह पातालकोट जो सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच 3000 फुट ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं से तीन ओर से घिरा हुआ है। इस अतुलनीय स्थान पर दो-तीन गांव तो ऐसे हैं जहां आज भी जाना नामुमकिन है। ऐसा माना जाता है कि इन गांवों में कभी सवेरा नहीं होता।पैराणिक कथाओं के अनुसार यह वही स्थान है, जहां से मेघनाथ, भगवान शिव की आराधना कर पाताल लोक में गया था। यही नहीं, यहां के स्थानीय लोग आज भी शहर की चकाचौंध से दूर हैं। उन्हें तो पूरी तरह से यह भी नहीं मालूम की शहर जैसी कोई भी चीज भी है। पातालकोट में ऐसी बेहतरीन जड़ी-बूटियां हैं, जिससे कई जानलेवा बीमारियों का आसानी से इलाज होता है। यहां के स्थानीय लोग इन्हीं जड़ी-बूटियों का प्रयोग करते हैं।

यहाँ पर मध्यप्रदेश की विलुप्त होती जनजाति भरिया लोग निवास करते है ,जिस जाति को विशेष पिछड़ी जनजातियों में शामिल किया गया है,