प्रकृति के करीब पातालकोट की सुंदरता

छिंदवाड़ा को प्रकृति ने अनमोल धरोहर दी है। अद्भुत चमत्कार दिया है। खूबसूरत वादियां दी हैं। पातालकोट की मनमोहक दृश्यावली, तामिया की पर्वत श्रेणियां, देवगढ़ का किला, कुकड़ीखापा का जलप्रपात और अनहोनी प्रकृति के खजाने हैं। सतपुड़ा की वादियों में अनगिनत दर्शनीय स्थल मौजूद हैं, फिर भी पर्यटन की दृष्टि से जिला समृद्ध नहीं है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कारगर योजना नहीं बनाई गई। सैलानियों के लिए पर्यटन स्थलों को विकसित नहीं किया गया। नतीजा, छिंदवाड़ा आज भी पर्यटन के मानचित्र से कटा हुआ है।तामिया और पातालकोट
तामिया और पातालकोट पर्वत श्रेणियों, वन संपदा और जड़ी बूटियों की वजह से विश्व विख्यात हैं। घने जंगल और छोटा महादेव को देखकर मन आनंदित हो जाता है। पातालकोट प्रकृति का चमत्कार है। यह धरती से 1200 फीट गहराई में है। गहराई की वजह से यह बहुत मनमोहक है। यहां के विहंगम दृश्य लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पर्वत श्रेणियां शांति का अभ्यास कराती हैं। तलहटी में 12 गांव बसे हुए हैं। यहां वर्षों से भारिया आदिवासी निवास कर रहे हैं।

पातालकोट

संभावनाएं
तामिया और पातालकोट में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। ट्रैकिंग और सफारी आरम्भ की जा सकती है। एडवेंचर स्पोट्र्स, होम स्टे, स्थानीय व्यंजन को बढ़ावा, जड़ी-बूटियों को बढ़ावा जैसी गतिविधियां की जा सकती हैं।अब तक क्या हुआ
पातालकोट में एडवेंचर स्पोट्र्स की शुरुआत की गई थी। इसमें स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला, लेकिन दो से तीन बार आयोजन करने के बाद एडवेंचर स्पोट्र्स बंद कर दिया गया। जिला प्रशासन और वन विभाग ने स्थानीय युवाओं को गाइड का प्रशिक्षण दिया। पर्यटन गतिविधियां संचालित न होने की वजह से प्रशिक्षित गाइड बेकार बैठे हुए हैं।

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